Shree Ganpati Chalisa – Attract Wealth, Peace and Spritulity

दैनिक पाठ की शक्ति: आपको गणेश चालीसा क्यों पढ़ना चाहिए

We discover a timeless wellspring of knowledge and devotion that cuts beyond boundaries and speaks to the very core of our being in the holy lyrics of the Ganesh Chalisa. Each word and each phrase is a powerful testimony to Lord Ganesh’s omnipresence and conveys a message that touches the core of our beings. Here are several benefits of chanting the Ganesh Chalisa daily.

गणेश चालीसा के पवित्र छंदों में, हमें ज्ञान और भक्ति का एक कालातीत स्रोत मिलता है जो सीमाओं से परे है और हमारे अस्तित्व के सार को छूता है। प्रत्येक शब्द, प्रत्येक पंक्ति, भगवान गणेश की दिव्य उपस्थिति का एक गहरा प्रमाण है और एक संदेश देता है जो हमारी आत्मा में गहराई से गूंजता है। यहां बताया गया है कि आपको दैनिक आधार पर गणेश चालीसा का पाठ क्यों करना चाहिए:

  1. Blessings of Wisdom and Direction: Lord Ganesh is praised in the Ganesh Chalisa as the “Vishwa Vinayaka,” or “bestower of wisdom.” You can bring his heavenly counsel into your life and use it to assist you negotiate the difficulties of life with clarity and insight by saying these verses every day.
  2. बुद्धि और मार्गदर्शन का आशीर्वाद: गणेश चालीसा में भगवान गणेश को “विश्व विनायक” – बुद्धि के दाता के रूप में महिमामंडित किया गया है। इन छंदों को प्रतिदिन पढ़ने से, आप उनके दिव्य मार्गदर्शन को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं, जिससे आपको स्पष्टता और अंतर्दृष्टि के साथ अस्तित्व की जटिलताओं को नेविगेट करने में मदद मिलती है।

  1. Obstacle Removal: Lord Ganesh is renowned for being the “Vighna Haran,” or obstacle remover. By reciting the Ganesh Chalisa every day, you can enlist his assistance in removing obstacles that stand between you and spiritual and material success.
  2. बाधाओं को दूर करना: भगवान गणेश को बाधाओं को दूर करने वाले “विघ्न हरण” के रूप में जाना जाता है। गणेश चालीसा का दैनिक पाठ आध्यात्मिक और सांसारिक मामलों में आपकी प्रगति में बाधक बाधाओं को दूर करने के लिए उनकी कृपा का आह्वान करता है।

  1. The development of Inner Peace: The calming lyrics of the Ganesh Chalisa foster calm and inner peace. By spending time each day with these holy words, you can develop a sense of peace and equanimity that will help you deal with the difficulties of life.
  2. आंतरिक शांति की खेती: गणेश चालीसा के सुखदायक छंद शांति और आंतरिक शांति का माहौल बनाते हैं। जब आप हर दिन इन पवित्र शब्दों में खुद को डुबोते हैं, तो आप शांति और समानता की भावना विकसित करते हैं जो आपको जीवन की चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती है।

  1. Spiritual Development and Enlightenment: The Ganesh Chalisa is a spiritual journey as well as a collection of poetry. Recitation on a regular basis encourages spiritual development and strengthens your relationship with the divine, advancing you closer to enlightenment and self-realization.
  2. आध्यात्मिक विकास और ज्ञानोदय: गणेश चालीसा केवल छंदों का संग्रह नहीं है; यह एक आध्यात्मिक यात्रा है. नियमित पाठ करने से परमात्मा के साथ आपका संबंध गहरा होता है और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा मिलता है, जो आपको आत्मज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है।

|| श्री गणेशाय नमः ||

दोहा

जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय गिरिजालाल॥ ॥

चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू ।

मंगल भरण करण शुभः काजू ॥

जै गजबदन सदन सुखदाता ।

विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।

तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

राजत मणि मुक्तन उर माला ।

स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।

मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।

चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।

गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।

मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।

अति शुची पावन मंगलकारी ॥

एक समय गिरिराज कुमारी ।

पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।

तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।

बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।

मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।

बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।

पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।

पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।

लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।

नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।

सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा ।

दे खन भी आये शनि राजा ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।

बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।

उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।

का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।

शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।

बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।

सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।

शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।

काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो ।

प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।

पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

चले षडानन, भरमि भुलाई ।

रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।

तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।

नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।

शेष सहसमुख सके न गाई ॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।

करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।

जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।

अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

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